अञ्जुको सम्बन्ध बिच्छेद !

अञ्जुले मनोजसँग सम्बन्धबिच्छेदका लागि एक कानुन ब्यबसायीसँग परामर्श गरिरहेकी छन् ।

टीचर के टॉपलेस फोटो ने मचाया तूफान

ब्रिटेन के नामी हैरो स्कूल की एक आर्ट टीचर के टॉपलेस फोटो ने तूफान मचा दिया है। आर्ट टीचर जोएन सैली के ये उत्तेजक फोटो स्कूल के स्टूडेंट्स के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं।

सेक्स डॉल ने बढ़ा दी सायरस की परेशानी!

किसी की लोकप्रियता और खूबसूरती का इससे भद्दा इस्तेमाल और क्या हो सकता है कि उसके नाम और पहचान पर सेक्स डॉल की बिक्री शुरु कर दी जाए।सिंगर माइले साइरस के साथ कुछ ऐसा ही हुआ है।

अब नही देख पाएंगे पोर्न साइट्स

चीन में 62 ऐसी वेबसाइटों को प्रतिबंधित कर दिया गया है

लांच हुआ दुनिया की सबसे बड़ी साइज का ब्रा

ब्रिटेन की एक कंपनी ने दुनिया की सबसे बड़ी साइज का ब्रा लांच किया है।

Sunday, August 11, 2013

न्यूड टूरिज्म, जहां यात्रा करने वाले सभी लेते हैं ट्रैवलिंग का मजा कपड़े उतारकर!

ट्रेवलिंग किसे पसंद नहीं होती और हर कोई अपने बिजी शेड्यूल में से वक्त निकालकर घूमने-फिरने जाने की चाहत रखता है। एक तो इससे मन फ्रेश होता है, दूसरा देश और दुनिया को जानने और यह समझने का मौका मिलता है इससे कि दुनिया की कितनी हसीन है। इसके लिए हम बहुत तैयारियां भी करते हैं और कई हफ्तों पहले से प्लानिंग की वहां कहां ठहरेंगे और वहां क्या खाएंगे और कपड़े कौन से रख लिए जाएं जो हम वहां पहनेंगे।
मजे की बात यह है कि इसके लिए अमेरिकन एसोसिएशन फॉर न्यूड रिक्रिएशन जैसी संस्थाएं भी काम करती हैं। और बताया जाता है कि इससे उन्हें काफी मुनाफा होता है।

 
इस न्यूड टूरिज्म पैकेज में 2974 यात्रियों को जाने की इजाजत होती है, जो नंगे होकर अपनी यात्रा को एंजॉय कर सकते हैं।
यह क्रूज कार्निवाल क्रूज की तरह ही होता है, जिसपर ये यात्रा करते हैं। इसमें तीन पूल्स, जॉगिंग ट्रेक और डांस क्लब भी होता है। अमेरिका में नेन्सी टाइमेन इस न्यूड टूरिज्म इंडस्ट्री की संचालक हैं। जो बड़े से बड़े क्रूज का इंतजाम इस यात्रा के लिए करती हैं। क्योंकि लोगों में इसका क्रेज बढ़ता जा रहा है। 

न्यूड टूरिज्म, जहां यात्रा करने वाले सभी लेते हैं ट्रैवलिंग का मजा कपड़े उतारकर!
इसके अलावा छोटे न्यूड क्रूज भी इसके लिए होते हैं जो ग्रीक आईलैंड, क्रोशिया और इटेलियन व फ्रेंच रिविऐरा में भी मिलते हैं। लेकिन जब अपनी यात्रा के दौराना इजिप्ट जैसी जगहों पर पिरामिड आदि के पास जाते हैं, तब उस जगह के कल्चर के अनुरूप इन्हें कपड़ेे पहन लेने पड़ते हैं।

इन न्यूडिस्ट का कहना है कि वे इस तरह की अनूठी यात्रा का हिस्सा इसलिए बनते हैं कि वे मानते हैं कि हरेक का तन सुंदर है और इसे दूसरों के सामने खोलने में कोई शर्म नहीं होती। 
वहां भी वे एक दूसरे के साथ बड़े ही दोस्ताना ढंग से पेश आते हैं और एक-दूसरे से खुलकर मिलते हैं। साथ ही वे अपने इस न्यूडिज्म को किसी के और जबरन नहीं थोपते और जहां इसकी मान्यता नहीं है वे वहां उसी कल्चर के अनूरूप कपड़े भी पहन लेते हैं।
इस तरह की न्यूड यात्रा की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इससे न्यूड टूरिज्म इंडस्ट्री ने पिछले साल 50,000 यू.एस डॉलर की कमाई की बात कही है।





डेढ़ करोड़ की व्हिस्की

शराब जितनी पुरानी हो उतनी अच्छी होती है और उसी लिहाज से उसकी कीमत भी ज्यादा होती है ऐसा पीने वालों का कहना है। फिर भी 64 साल पुरानी व्हिस्की की दो बोतलों के लिए आखिर कितनी कीमत ठीक मानी जा सकती है..दस हजार.. पचास हजार..एक लाख..दस लाख या फिर पूरे..डेढ़ करोड़!
जी हां! व्हिस्की पीने के शौकीन दो लोगों ने ग्लासगो में डलमोर 64 ट्रिनिटास व्हिस्की की दो बोतल पूरे दो लाख पौंड (लगभग डेढ़ करोड़ रुपये) खर्च करके खरीदी। आज से लगभग 64 साल पहले व्हिस्की की ये तीन बोतलें तैयार की गईं थीं, जिनमें से फिलहाल दो बोतलें ही बेचीं गई हैं। तीसरी बोतल बाद में बेचीं जायेगी। खरीदारों में एक अमेरिकन तो दूसरा ब्रिटिश नागरिक है।

जादुई गोली से जी सकेंगे 150 साल

150 years
जादुई गोली से जी सकेंगे 150 साल
मेलबर्न। तरह-तरह के उत्पाद अपने विज्ञापनों में बढ़ती उम्र को रोकने और जवान बनाए रखने के दावे करते हैं। अगर सबकुछ ठीक रहा तो वह दिन दूर नहीं जब यह दोनों ही हसरतें पूरी हो जाएंगी। शोधकर्ताओं ने एक ऐसी दवा बनाने का दावा किया है जिससे व्यक्ति 150 साल जी सकेगा। उनका कहना है कि बढ़ती उम्र के लक्षणों से मुकाबला करने में सक्षम यह दवा पांच साल के अंदर बाजार में मौजूद होगी।
अध्ययन के मुताबिक मानव शरीर में एक खास एंजाइम को निशाना बनाया जाएगा, जो बढ़ती उम्र संबंधी बीमारियों को रोकेगा और लंबी आयु प्रदान करेगा। यह शोध विज्ञान पत्रिका जर्नल साइंस में प्रकाशित हुआ है। शोधकर्ताओं का कहना है कि इस अकेले एंजाइम पर 117 दवाओं के परीक्षण के बाद यह दावा किया गया है। उनके मुताबिक यह दवा कैंसर, अल्जाइमर और टाइप 2 डायबिटीज जैसी बीमारियों को रोकने में सक्षम होगी। प्रमुख शोधकर्ता यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स के प्रोफेसर डेविड सिनक्लेयर ने कहा, आजकल की दवाओं के विपरीत यह 20 अन्य रोगों की रोकथाम करेंगी। मगर अंत में एक दवा एक रोग का इलाज करेगी।

इंटरनेट कैफे में बिताए छह साल

cyber cafe
इंटरनेट कैफे में बिताए छह साल
शंघाई। खाली समय में कंप्यूटर गेम में वक्त बिताने वाले तो कई लोग मिल जाएंगे लेकिन एक सज्जन ने इस मामले में रिकॉर्ड कायम किया है।
कंप्यूटर गेम का दीवाना यह व्यक्ति पिछले छह वर्षो से एक ही इंटरनेट कैफे की एक ही कंप्यूटर स्क्रीन पर लगातार कंप्यूटर गेम में व्यस्त है। यह कैफे में ही रहता है और अपनी सीट पर ही खाता-पीता है। यह रात भर कंप्यूटर गेम में मशगूल रहता है और दिन में स्क्रीन के सामने ही सोता है। केवल नित्यकर्म के दौरान ही उसका मॉनीटर बंद रहता है। इस संबंध में कैफे मालिक का कहना है कि उसकी वजह से स्टाफ में कभी किसी को दिक्कत नहीं होती क्योंकि वह केवल तकनीकी खराबी के दौरान ही बातचीत करता है। हर महीने समय पर उसका पूरा बिल भी जमा हो जाता है।

दीवार करेगी बात

वाशिंगटन। इंटरनेट के आदी लोगों के लिए अब नई तकनीक किसी वरदान से कम नहीं। दिन-रात ऑनलाइन रहने वाले लोगों के लिए अब घर की सारी दीवारें ही किसी स्क्त्रीन की तरह काम करेंगी। इन दीवारों पर आप ऑनलाइन स्क्त्रीन की तरह काम कर सकते हैं। इस वॉल पर फेसबुक अपडेट से लेकर आदमकद आकार में मित्रों से लाइव चैटिंग भी होगी।
एक स्पैनिश डिजाइन एजेंसी थिंक बिग फैक्टरी के निदेशक क्यूरस मॉन्स ने बताया कि इस ओपनआर्च प्रणाली का हार्डवेयर पूरी तरह से बनकर तैयार है लेकिन सॉफ्टवेयर पर चालीस फीसद काम ही पूरा हुआ है। यह स्पेनिश एजेंसी ही इस पूरे प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। अपने घर की इस डिजिटल दीवार को ऑनलाइन गतिविधियों के लिए आप कहीं से भी नियंत्रित कर सकते हैं। बोल कर या किसी शारीरिक गतिविधि से आप अपने निर्देशों को नियंत्रित कर सकते हैं। घर की हर चीज को संचार माध्यम के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि इस सबको चलाने के लिए घर में एक व्यक्ति की मौजूदगी जरूरी होगी। घर के किसी भी कोने से स्काइप को शुरू करते ही आप इस तकनीक की मदद से हाथ के इशारे से घर की बत्तियां जला-बुझा सकते हैं। किसी घरेलू उपकरण को ऑन कर सकते हैं और संगीत भी सुन सकते हैं। क्यूरस का कहना है कि ऐसा घर दिखने में कुछ अलग नहीं होगा। लेकिन तकनीक की मदद से दीवारें वो काम करेंगी जो आप अपने लैपटॉप, कंप्यूटर या मोबाइल स्क्त्रीन पर करते हैं। आप अपने लिविंग रूम में दीवारों पर सोशल नेटवर्किग साइट से लेकर मैग्जीन सर्फ करने से लेकर वीडियो गेम तक खेल सकते हैं। माइक्त्रोसाफ्ट के किनेक्ट कैमरे के जरिए प्रोटोटाइप तकनीक व्यक्ति की गतिविधियों को कैद करती है और उसके हिसाब से ही घर के अंदर दिशा-निर्देशों का संचार करती है। इस प्रणाली में प्रोजेक्टरों और सेंसरों की मदद से दीवार को स्क्त्रीन में परिवर्तित किया जाएगा।

पूंछ वाला बच्चा

दुनिया में जाने कितने तरह के लोग होते हैं पर मूल बनावट हर किसी की एक सी होती है। आप अफ्रीका जाओ या अमेरिका, यूरोप जाओ या ऑस्ट्रेलिया, काले-गोरे, नाटे-लंबे कई तरह के लोग मिलेंगे पर शारीरिक बनावट सबकी एक सी होती है। सबकी सूरतें अलग-अलग, हाव-भाव अलग हैं पर फिर भी सभी एक से दिखते हैं। जैसे दुनिया के किसी भी कोने में चले जाओ तीन आंखों वाला इंसान नहीं मिलेगा। किसी का भी दो सिर नहीं होगा, चार या छ हाथ नहीं होंगे, तीन पैर नहीं होंगे। हालांकि कभी-कभार अपवाद भी हो जाया करते हैं।
भारत के पंजाब प्रांत के फतेहपुर में एक 12 वर्षीय बच्चा ऐसा ही एक अपवाद है। चौंकिए मत, उसकी आंखें, सिर, हाथ-पैर सब आपकी ही तरह हैं पर हां, शरीर का एक हिस्सा इंसान के शुरुआती दौर की बात याद कराता है, यानि आदिम मानव। अपने विकास के शुरुआती दौर में इंसान बंदर माने जाते हैं और उनकी पूंछ हुआ करती थी। हालांकि धीरे-धीरे इस पूंछ की लंबाई घटते-घटते इंसानी शरीर से पूरी तरह लुप्त हो गई। पर आज भी किसी-किसी में अवांछित रूप से इसका विकास हो जाता है। फतेहपुर के इस 12 वर्षीय अरशद अली के साथ भी ऐसा ही कुछ हुआ। अरशद अली की पूंछ है।
डॉक्टरी भाषा में इसे मेनिंगोसिले नामक बीमारी के नाम से जाना जाता है पर आम लोग इसे कुछ और ही मान रहे हैं। खबरों के अनुसार पूंछ होने के साथ ही अरशद की पीठ पर हनुमान की तरह 9 पवित्र निशान भी हैं। इसके अलावे भी पैरों के तलवों पर पद्म निशान और बायीं बांह पर सीता और कड़े का निशान है। 15 फरवरी, 2001 को जन्मा अरशाद लोगों के लिए हनुमान का रूप और उनकी मनोकामनाएं पूर्ण करने वाला बच्चा है। लोग उससे आशीर्वाद लेने आते हैं। पर अरशाद की अपनी जिंदगी बहुत ही चुनौतीपूर्ण है। अरशाद के पिता की मृत्यु हो चुकी है। उसकी मां दूसरी शादी कर अपने पति के साथ रहती है। बचपन से अकेलेपन का दंश झेल रहा अरशद अपने नाना के साथ रहता है।
उसके नाना ही उसकी देखभाल करते हैं। इस अनचाही पूंछ के कारण अरशाद को चलने, उठने-बैठने में दिक्कत होती है। उसके नाना ने डॉक्टरों से जब इसे हटाने के लिए ऑपरेशन की बात की तो डॉक्टरों ने ऑपरेशन से अरशाद की जान को खतरा बताया। सातवीं कक्षा का छात्र अरशाद, लोगों के लिए कौतूहल का विषय बनकर इस पूंछ के साथ ही अपनी संघर्षमय जिंदगी जीने के लिए मजबूर है।

अजूबा है यह नज़ारा

आप इसे दुनिया का सबसे बड़ा ट्रक कह सकते हैं। यह किसी आम पावर वैगन से 8 गुना बड़ा है। इसकी कैबिन में 4 बेडरूम हैं। इस अनोखे ट्रक को अबू धाबी के शेख म्यूज़ियम में रखा गया है।


वैसे कहा तो जा रहा है कि केले का यह अनोखा बंच ताइवान में देखा गया है, जिसमें 3600 केले लगे हैं।
आसमान में डिनर करना भला कौन नहीं पसंद करेगा और इसी सपने को सच किया है बेल्जियम ने। इस 'डिनर इन द स्काई' में कुल 22 गेस्ट एकसाथ बैठकर खाना खा सकते हैं। बेल्जियम जाने का मौका मिले तो यहां जरूर जाएं।



Tuesday, August 6, 2013

एक ऐसी बिल्डिंग जो गाती है


जर्मनी की यह बिल्डिंग गाती है यहां रहने वाले इंसान नहीं। इसपर लगे इन सैक्सोफोननुमा पाइपों में से बहती है संगीत की धार... कैसे? 
इस बिल्डिंग पर जब भी बारिश की बूंदें गिरती हैं, तो इसमें से निकलता है मधुर संगीत...
जर्मनी के ड्रेसडन में बसी है यह बिल्डिंग। स्टूडेन्ट्स एरिया में बनी यह बिल्डिंग लोगों के बीच आकर्षण का केन्द्र बनी हुई है।

इस बिल्डिंग पर लगे ये पाइप बिल्कुल ऐसे लगते हैं जैसे कोई म्यूज़िकल इन्स्ट्रूमेन्ट नहीं है। पर हैं क्या? 
नहीं-आर्ट के इस बेहतरीन एग्जाम्पल को तीन लोगों ने मिल कर डिजाइन किया है।नहीं। ये सचमुच म्यूज़िकल इन्स्ट्रूमेन्ट्स नहीं हैं। ये तो इस बिल्डिंग के ड्रेन और गटर हैं। है न कमाल?

उन्होंने सोचा, ड्रेन तो बनाने ही हैं। तो क्यों न उन्हें कुछ ऐसे बनाया जाए कि वह सब से अलग हों। और नतीजा, आपके सामने है...
इन छोटे-छोटे पाइपों से जब पानी इस बड़ी पाइप में गिरता है, तब छूटता है संगीत और आस-पास बहने लगता है..
इन ड्रेनेज पाइप्स को शक्ल भी ऐसी ही दी गई है मानो ये म्यूज़िकल इन्स्ट्रूमेन्ट्स हों...


इन पाइपों और गटरों को आपस में ऐसे जोड़ा गया है कि एक का पानी निकल कर सीधा दूसरी में जाता है।
कला का अद्भुत नमूना है यह बिल्डिंग.

ऐंजलीना को गिफ्ट में प्राइवेट जेट



लंदन।। हॉलिवुड ऐक्टर ब्रैड पिट के बारे में खबर है कि वह अपनी हमसफर ऐंजलीना जोली के लिए एक निजी विमान खरीदना चाहते हैं।

'कॉन्टैक्ट म्यूजिक' के अनुसार, हॉलिवुड ही नहीं दुनिया भर में चर्चित यह ऐक्टर-ऐक्ट्रेस जोड़ा आजकल एक-दूसरे के पास रहने के लिए पूरा टाइम नहीं निकाल पा रहा है। इसकी वजह यह है कि 38 साल की खूबसूरत और काबिल ऐक्ट्रेस जोली अपने निर्देशन में बन रही फिल्म 'अनब्रोकन' को लेकर बेहद व्यस्त हैं।

वैसे जोली के पास पायलट का लाइसेंस है। ऐसे में ब्रैड द्वारा उन्हें जेट गिफ्ट करना बढ़िया सोच ही कही जाएगी। पास में निजी विमान होने से दोनों एक-दूसरे से जल्दी-जल्दी मिल सकेंगे।
Angelina Jolie with Brad Pitt

पाकिस्तान का सलमान,सलमान खान का डुप्लिकेट

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सलमान खान को 
अब अगर बॉडी डबल की जरूरत पड़े, तो शायद वह पाकिस्तान जाना चाहें! दरअसल, पाकिस्तान के सियालकोट जिले के हसनैन सलीम इन दिनों इंटरनेट पर चर्चा का विषय बने हुए हैं और इसकी वजह उनका बॉलिवुड ऐक्टर सलमान खान के जैसा दिखना है। हसनैन न सिर्फ सलमान जैसे दिखते हैं, बल्कि पाकिस्तान में इंटरनेट पर उनकी फॉलोइंग भी सलमान जैसी ही है। उनके बोलने-चलने का स्टाइल भी सल्लू मियां जैसा है।

यंग सलमान दिखने वाले हसनैन ने बॉडी भी सलमान खान जैसी ही बनाई हुई है। यही वजह है कि उन्हें इंडियन ऐक्टर सलमान खान के पाकिस्तानी फैन्स से बहुत वाहवाही मिल रही है। लोग वहां उनके साथ हाथ मिलाते हैं, फोटो खिंचवाते हैं और उन्हें बिल्कुल ऐक्टर की तरह ही ट्रीट करते हैं।

पाकिस्तान के एक टीवी चैनल ने हसनैन का परिचय देते हुए कहा, 'अगर आप सलमान खान, द सुपरस्टार, से मिलना चाहते हैं तो उसके लिए आपको इंडिया जाने की जरूरत नहीं।' लेकिन हर कोई हसनैन के सल्लू ऐक्ट से इम्प्रेस नहीं है। पाकिस्तान फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े एक सूत्र ने हमें बताया, 'इस लड़के ने सलमान के साथ अपनी शारीरिक समानता को कुछ ज्यादा ही गंभीरता से ले लिया है। इसने हाल ही में अपना हेयरकट बदला है, ताकि वह इस समानता को पूरा कर सके। वह सलमान को कॉपी करता है। उसने सलमान की तरह चलना और बोलना भी शुरू कर दिया है।'

ऐक्ट्रेस जूही चावला के अंकल और पाकिस्तान में लीडिंग डिस्ट्रिब्यूटर सतीश आनंद, जो 'वन्स अपॉन ए टाइम इन मुंबई दोबारा' डिस्ट्रिब्यूट कर रहे हैं, का कहना है, 'सलमान के इस ड्यूप्लिकेट के बारे में कोई चर्चा नहीं है। कोई इसे गंभीरता से नहीं ले रहा है। ज्यादा से ज्यादा यह कैमियो हासिल कर सकता है। ड्यूप्लिकेट्स आते और जाते हैं। आपके स्टार को इससे कोई डर नहीं- न ही गंभीर, न ही हल्का।'

ऐश्वर्या अपने आइटम डांस से करेंगी सबको कायल

Aishwarya rai bachchan
अब ऐश्वर्या अपने आइटम डांस से करेंगी सबको कायल
मुंबई। ऐश्वर्या राय बच्चन का नाम बॉलीवुड की उन अभिनेत्रियों की लिस्ट में शामिल है जिनके चाहने वालों की लिस्ट में कभी भी कोई कमी नहीं हुई है। ऐश्वर्या राय के शादी करके बच्चन परिवार का हिस्सा बन जाने के बाद भी लोग उन्हें फिल्मी पर्दे पर अभिनय करते देखने के लिए तरसते हैं। बस अब और इंतजार नहीं ऐश्वर्या राय बच्चन जल्द ही संजय लीला भंसाली की अगली फिल्म 'रामलीला' में आइटम डांस करते हुए नजर आएंगी जिसमें अभिनेत्री दीपिका पादुकोण और अभिनेता रणवीर सिंह मुख्य भूमिका निभा रहे हैं।
बॉलीवुड के सूत्रों का कहना है कि मशहूर निर्देशक संजय लीला भंसाली को ऐसा लगता है कि उनकी फिल्म 'रामलीला' में आइटम नंबर के साथ न्याय केवल ऐश्वर्या राय बच्चन कर सकती हैं। वैसे ऐश्वर्या पहले भी संजय लीला भंसाली के निर्देशन में 'निम्बो ड़ा' 'ढोली तारो' और 'डोला रे' जैसे कई सुपरहिट डांस नंबर कर चुकी हैं। यदि आइटम नंबर की बात की जाए तो फिल्मो 'बंटी बबली' के आइटम सांग 'कजरा रे' पर आइटम डांस करके ऐश्वर्या राय बच्चन ने हजारों दर्शकों को अपना कायल बना लिया था।
ऐसा लगता है कि जैसे आजकल बॉलीवुड में एक नया ट्रेंड आ ग्या है जिसमें अपने समय में हिट रह चुकी एक्ट्रेस सालों बाद बॉलीवुड में आइटम सांग के जरिए कमबैक करती है। हाल ही में सिल्वर स्क्रीन से दूर रही अभिनेत्री माधुरी दीक्षित ने अयान मुखर्जी की फिल्म 'ये जवानी है दीवानी' के आइटम सांग आगरा से घाघरा में आइटम डांस करके फिर से अपने चाहने वालों को अपना कायल बना लिया। फिल्म 'आजा नच ले' से माधुरी दीक्षित ने सिल्वर स्क्रीन पर कमबैक तो किया पर उनके प्रशंसकों की तारीफ उन्हें आइटम सांग 'आगरा से घाघरा' के बाद ही मिली। ऐश्वर्या राय बच्चन से भी लोगों को माधुरी दीक्षित जैसी ही कुछ उम्मीदें हैं कि वो फिर से एक बार बॉलीवुड में अपना मुकाम बना पाएंगी।

अमेरिका में चार साल का बच्चा दोबारा बना मेयर

mayer in america
कमाल कर दिया! अमेरिका में चार साल का बच्चा दोबारा बना मेयर
न्यूयार्क। यकीन नहीं होगा, लेकिन यह हकीकत है। अमेरिका में एक छोटे से शहर के मेयर पद पर चार साल का नन्हा बालक दोबारा काबिज हुआ है, जो अभी तक प्री-स्कूल भी पूरा नहीं कर पाया है।
स्थानीय मीडिया के अनुसार, चार वर्षीय राबर्ट 'बॉबी' टफ्ट्स रविवार को मिनेसोटा के छोटे से कस्बे डोर्सेट का मेयर पुन: निर्वाचित हुआ। डोर्सेट के वार्षिक उत्सव में टफ्ट्स के नाम की पर्ची निकलने पर उसे दोबारा कस्बे का मेयर घोषित किया गया। इसके पहले जब वह पहली दफा मेयर चुना गया था तब उसकी उम्र महज तीन वर्ष थी।
पर्यटक स्थल डोर्सेट की कुल आबादी मात्र 22 से 28 लोगों के बीच रहती है। इस छोटे से कस्बे में कोई स्थानीय शासन नहीं है जिसके कारण यहां के लोगों की जब इच्छा होती है तब वे नये मेयर का चुनाव कर लेते हैं, वह भी महज एक डॉलर (करीब 60 रुपये) खर्च कर। इसके लिए स्टोरों पर मतदान बाक्स रख दिए जाते हैं और मतदान से इकट्ठा हुई धनराशि की मदद से कस्बे के लोगों के लिए उत्सव का आयोजन किया जाता है। मेयर के रूप में बॉबी का पहला साल काफी सफल रहा। इस दौरान उसने समर वॉक से 750 डॉलर (45 हजार रुपये) इकट्ठा किए।

इस छोटी सी बच्ची ने किया कमाल, आइंस्टीन को भी छोड़ा पीछे

Einstein
इस छोटी सी बच्ची ने किया कमाल, आइंस्टीन को भी छोड़ा पीछे
लंदन। ब्रिटेन में एक स्कूली छात्रा ने बुद्धिमत्ता के मामले में भौतिक शास्त्र के महारथी वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन और भौतिकविद् स्टीफन हॉकिंग को मात दे दी है।
ब्रिटिश मेनसा के प्रवक्ता ने बताया कि 11 वर्षीय केरिस कुकसामी पारनेल ने मेनसा आइक्यू टेस्ट में 162 अंक हासिल किए। वह हॉकिंग, आइंस्टीन और माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स से ज्यादा बुद्धिमान है, जिनका आइक्यू स्तर 160 है।
छठी कक्षा में पढ़ने वाली पारनेल ने मेनसा आइक्यू प्रतियोगिता में हिस्सा अपने पिता से ज्यादा अंक हासिल करने के लिए लिया था, जिन्होंने 142 अंक हासिल किए थे। डेली एक्सप्रेस अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, पारनेल ने न केवल अपने पिता से बल्कि टेस्ट में मिलने वाले सर्वाधिक 162 अंक हासिल किए हैं।' नार्थहैंपटन निवासी पारनेल ने गत 27 जुलाई को परीक्षा दी थी। वह यह टेस्ट देने वाली सबसे कम उम्र की प्रतिभागियों में से एक हैं। पारनेल ने कहा, 'टेस्ट देने का मेरा मकसद अपने पिता से ज्यादा अंक हासिल करना था, लेकिन मुझे उम्मीद नहीं थी कि मैं इतने ज्यादा अंतर से जीत जाऊंगी।' वह एक बैंकर बनना चाहती हैं। उल्लेखनीय है कि जिंदा रहते हुए आइंस्टीन ने कभी आइक्यू टेस्ट नहीं दिया, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि उनका आइक्यू स्तर 160 के करीब था।

बर्गर-चाय की प्याली की तरह दिखती है कार

Sudhakar Yadav
बर्गर-चाय की प्याली की तरह दिखती है कार
इस विशुद्ध भारतीय कार की खूबी यह है कि यह कार जैसी तो बिल्कुल भी नहीं दिखती। यह बनाई कुछ इस तरह गई है कि शायद आप इसे खाने-पीने, इस पर सोने, पढ़ाई करने के लिए उपयोग करना या इससे क्रिकेट या फुटबॉल खेलना चाहें। इस कार के लिए कोई निश्चित आकार, रंग या बैठने की सीट नहीं है। आप जैसा चाहेंगे यह कार वैसी ही दिखती है। आपको बर्गर बहुत पसंद है, इस कार को बर्गर बनाकर रख सकते हैं। चाय के दीवाने हैं, यह कार चाय की प्याली बन जाएगी। क्रिकेट बहुत पसंद है, आप इसे बैट-बॉल बनाकर रख सकते हैं। आपको फुटबॉल बहुत पसंद है, इसे फुटबॉल के आकार में सड़कों पर चला सकते हैं। सिगरेट बहुत पीते हैं, इस सिगरेटनुमा कार को आप धड़ल्ले से सड़कों पर चला सकते हैं। आप थकते बहुत ज्यादा हैं पर सफर में अपना आरामदायक दीवान बेड तो लेकर चल नहीं सकते, इसलिए यह कार आपके दीवान बेड की तरह ही दिखती और उतनी ही आरामदायक है। इसे चाहें तो अपने सोने के कमरे में डबल बेड के रूप में सजाएं या आधी रात में इसे चलाकर सड़कों पर निकल जाएं। ये कहानियां नहीं कारें हैं असली कारें, जिन्हें आप कार की तरह सड़कों पर चला सकते हैं पर बैट-बॉल, कप-प्लेट, बर्गर, सिगरेट, फुटबॉल, दीवान बेड, सोफा, झूला, स्टडी टेबल, कैमरे की तरह दिखने वाली ये कारें कहीं से भी आपको कार की तरह नहीं दिखेंगी। आपने महंगी से महंगी गाडि़यां देखी होंगी पर ऐसे अजूबे कार शायद कभी न देखे हों।
भारत में मूल रूप से हैदराबाद के रहने वाले सुधाकर यादव को बचपन से ही कारों का बहुत शौक था। पर आज वह उल्लेखित इसलिए हैं क्योंकि उनकी पसंद सिर्फ कार नहीं थी, उन्हें रोजाना उपयोग की जाने वाली चीजों जैसी दिखने वाली कारें चाहिए थीं। अब आपके डबल दीवान बेड की तरह दिखने वाली कारें तो मिलती नहीं और उन्हें वैसी ही कार चाहिए थी। इसलिए उन्होंने अपनी पसंद की कार खुद बनाने की सोची। 14 साल की उम्र से ही उन्होंने कारें बनानी शुरू की थीं। बड़े होकर श्री सुधाकर का यही शौक एक प्रकार से उनका काम बन गया। आज उनकी बनाई 700 से अधिक कारें ऐसी ही अजीबोगरीब और लोगों के लिए कौतुहल का विषय हैं। कई लोगों ने सुधाकर से ऐसे कार उनके लिए बनाने का अनुरोध किया पर सुधाकर इन कारों को पेशेवर रूप से बेचना नहीं चाहते। इसलिए 700 की बड़ी संख्या में अपने सभी नायाब आकारों वाले इन कारों के लिए इन्होंने एक संग्रहालय बनाया है। सुधा कार संग्रहालय के नाम से इनका यह संग्रहालय अंतरराष्ट्रीय स्तर भी अपनी पहचान बना चुका है। इस संग्रहालय में आने के लिए एक हजार पाउंड (लगभग 90 हजार रुपए) की फीस है। इसलिए हर किसी के लिए इन कारों को देखना संभव तो नहीं है पर ऐसे कारों की कल्पना भी शायद हर किसी के लिए रोमांचक होगी।

बस एक गीयर के साथ उड़ चलेंगे..

Terrafugia

ट्रैफिक की परेशानियां नहीं, ट्रैफिक का कोई नियम नहीं, सब बस अपनी मरजी, अपनी सुविधा से, जैसे चाहो करो, सारा आसमान फिर आपका ही है। आप सोचेंगे, जरा हटके में ये बेतुकी बातें कहां से आ गई। पर जनाब, जरा रुकिए..सोचिए तो कि आखिर शब्द इशारा क्या कर रहे हैं! ये इशारा है आपके सपनों को पंख लगाने की तरफ। आपकी परेशानियों का एक रोमांचक हल ढूंढ़ने की तरफ, उन परेशानियों का हल जिससे आप रोज जूझते हैं पर कोई भी आपकी परेशानी को परेशानी समझने की जहमत नहीं उठाता। आप रोज इसके दर्द से कराहते हैं पर कोई इसे आपका दर्द मानता ही नहीं!
अमेरिका के ओश्कॉश में लोग आजकल उड़ने वाली कार का ऑर्डर दे रहे हैं। जी हां, उड़ने वाली कार। पिछले साल इस प्रोजेक्ट की घोषणा करने वाली टेराफ्यूजिया कंपनी ने पिछले सप्ताह यहां इस कार का प्रदर्शन किया। इस कार की खासियत यह है कि इसे उड़ाने या रखने के लिए आपको कोई मशक्कत करने की जरूरत नहीं है। आम कारों की ही तरह आप इस कार का रख-रखाव भी कर सकते हैं। उड़ने के लिए भी आपको हवाई जहाज की तरह रन-वे की जरूरत नहीं पड़ेगी। आप इसे रोड पर आम कारों की तरह ही चला सकते हैं। पर कई बार ऐसा होता है कि लंबी ट्रैफिक के कारण आप समय पर कहीं पहुंच नहीं पाते। बीच ट्रैफिक में आपको लगता है कि काश इसके बीच से उड़कर जा सकते!
यह कार कुछ ऐसी ही सोच को हकीकत में बदलती है। अगर कभी ऐसा हुआ कि आप लंबी ट्रैफिक में फंस जाएं, तो इस कार से आप चाहें तो बीच ट्रैफिक से उड़कर जा सकते हैं। इसके लिए आपको हवाई जहाज की तरह रन-वे पर दौड़ने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी। इसलिए लोगों को यह कार बहुत लुभा रही है। कंपनी ने पिछले साल इसका खाका पेश किया था और अब 2015 तक इस कार को पेश करने जा रही है। इसके लिए उसने ऑर्डर लेने शुरू कर दिए हैं। हालांकि अभी 10 हजार डॉलर की इसकी कीमत को देखते हुए सड़कों पर बहुत ज्यादा दिखने के आसार कम हैं। पर सोचना ही कितना रोमांचक है, आसमान में कारें दौड़ेंगी! शायद कल को आपके पास भी ऐसी एक कार हो।

Monday, August 5, 2013

साउदीमा हराए ६० हजार नेपाली महिला कामदार

काठमाण्डौं । गैरकानुनी रुपमा साउदी अरबमा ६० हजारभन्दा बढी घरेलु महिला कामदार (हाउसमेड) पुगेको भनिए पनि अहिलेसम्म करिब १ सय ८० बाहेकले स्वदेश फिर्तीको ‘आउट पास’ लिएका छैनन् ।
आममाफी घोषणाको पौने तीन महिना अवधिमा करिब ३५ हजार पुरुष कामदारले दूतावासबाट ‘आउट पास’ लिइसकेका छन् । तर यही अवधिमा स्वदेश र्फकन चाहने महिला कामदारको यो संख्या अत्यन्तै न्यून हो ।
भारतीय बाटो हुँदै साउदी पुगेको र र्फकनलाई समस्या परेको खबर आइरहने गरे पनि आममाफीमा भने उनीहरुले चासो दिएका छैनन् । आप्रवासी कामदारका लागि कार्यरत संस्थाहरुले महिला कामदारसम्म आममाफीको सूचना नपुगेकाले उनीहरुले अवसर लिन नसकेको बताएका छन् ।
‘हाउसमेडलाई यो खबर थाहै हुँदैन्,’ हाल नेपाल आएका एनआरएनए साउदीका सल्लाहकार इन्जिनियर धरम केसीले भने, ‘मुख्य कुरा सूचनाकै अभाव हो, अनि आममाफीको प्रक्रियाबारे थाहा नहुनु पनि हो ।’
साउदीमा नेपाली महिला कामदार मुख्यतः भारत हुँदै पुग्ने गरेको कान्तिपुर दैनिकमा खबर छ ।
केही खाडीका देश कुवेत, कतार, ओमन, बहराइन, यूएईका घरमा लगिएकालाई साहुले आफन्तलाई ‘उपहार’ भन्दै साउदी पुर्‍याउने गरेका छन् । साउदीस्थित नेपाली दूतावासले भने त्यहाँ घरेलु कामदार लैजान प्रमाणीकरण दिने गरेको छैन् ।

घरमा केक ल्याइदिने यान

एजेन्सी/ चीनमा एउटा यस्तो यानको आविष्कार भएको छ, जुन उड्दै ग्राहकको घरमा पुग्छ र अर्डरबमोजिमको केक र बेकरी दिएर फर्कन्छ ।
चीनको एउटा बेकरीले यस्तो विचित्रको यानको प्रयोग गरिरहेको छ । बेकरीले ग्राहकको सेवाका लागि यस्ता तीन ड्रोन यानको व्यवस्था गरेको छ । ड्रोन यानले बेकरीको प्रमुख शाखाबाट ग्राहकको अर्डर आकाशको बाटो प्रयोग गरी लैजान्छ ।

करिब साढे तीन फिट चौडाइ रहेको उक्त यानको वजन करिब १० किलो छ । यसलाई रिमोट कन्ट्रोलमार्फत नियन्त्रण गरिन्छ । यसमा राखिएको ट्विन क्यामेराले अर्डर दिने 
ग्राहक चिन्छ ।

पछिल्ला दिनमा चीनको हुआंगपु नदीमाथिबाट यस्ता यान ग्राहकको अर्डर पुर्‍याउन जाँदै गरेको देखिएका छन् । यान उडानका लागि नागरिक उड्ययन प्राधिकरणबाट अनुमति लिनुपर्छ ।

तर, यस्तो ‘डेलिभरी’ सेवा सबै प्रकारका ग्राहकलाई भने उपलब्ध छैन । किनकि, सेवा उपलब्ध गराउने उच्च दर्जाको भिआइपी बेकरी हो । जहाँ एउटा केकको अनलाइन अर्डर गर्न ३० हजार रुपैयाँभन्दा बढी खर्च हुन्छ । त्यहाँ ब्रिटेनका टप क्लासका केक मास्टर्सले केक बनाउँछन् ।

Indian man wearing dhoti not allowed on Dubai metro

A 67-year-old Indian visitor to Dubai was stopped from getting on the Dubai metro, apparently for wearing dhoti, India's traditional dress.

According to the victim's daughter Madhumati, a policeman stopped them near the punching gates of the Etisalat metro station last Saturday
 and told her father that this dress was not allowed and he could not go on the metro wearing it.
"I pleaded with him to let us go but the policeman refused to hear a word. It was really embarrassing and my father was really upset," she said.
Madhumati said that she tried her best to explain to the police officer that the dhoti was an Indian traditional dress, which covers the body fully but to no avail
. She filed a formal complaint after the incident.
She said her father, who is on a visit to Dubai, had travelled on the metro wearing the dhoti on various occasions but had never been stopped.
According to the Roads and Transport Authority (RTA), there is no official dress code or policy for the Dubai metro.
"What has happened is really surprising. There is no official restriction from the RTA and we have not given instructions on dress codes," said Ramadan Abdullah, director of operations at the RTA's Rail Agency.

"I think anything that covers the body and is respectable should be allowed. I believe it was a personal reaction on the part of the policeman and this matter will be investigated," he added.

ये मछलियां नाम लेकर बुलाती हैं...

डॉल्फिन मछलियां इंसानों की तरह एक-दूसरे को नाम से भी बुलाती हैं। स्कॉटलैंड की एक यूनिवर्सिटी के ताजा शोध में इस बात का पता चला है। वैज्ञानिकों का कहना है कि ये मछलियां एक दूसरे की पहचान जानने के लिए अलग-अलग तरह की सीटी बजाती हैं। जब इन्हें लगता है कि उनका नाम पुकारा जा रहा है तो वे इस पर प्रतिक्रिया देती हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि समुद में इनके रहने की कोई निश्चित जगह या सीमा नहीं होती, इस वजह से एक दूसरे के संपर्क में रहने के लिए एक व्यवस्था की जरूरत होती है। 

लंबे समय से ये माना जाता रहा है कि डॉल्फिन एक-दूसरे को पुकारने के लिए एक विशेष प्रकार की सीटी बजाती हैं, ठीक वैसे ही जैसे हम एक-दूसरे को नाम से पुकारते हैं। इसके लिए वैज्ञानिकों ने डॉल्फिनों की ध्वनि को रिकॉर्ड किया। इसके बाद उन्होंने पानी के नीचे स्पीकर लगाकर इस रिकॉर्ड को बजाया। देखा गया कि मछलियों ने केवल उन्हीं आवाजों पर प्रतिक्रिया दी, जिनमें उन्हें पुकारा गया था। उन्होंने भी प्रतिक्रिया देते हुए सीटी बजाई। वैज्ञानिकों का कहना है कि पहली बार किसी जीव में ऐसी क्षमता का पता चला है। हालांकि दूसरे शोधों से पता चला है कि संभवत: तोते की कुछ प्रजातियां अपने समूह में ऐसा करती हैं।

यह है अरबों का घर

लेथब्रिज हाउस नाम का यह घर बिकने को तैयार है, जिसकी कीमत 40 मिलियन पौंड यानी 3 अरब 73 करोड़ 59 लाख रुपए है। लेथब्रिज हाउस नाम का यह घर ब्रिटेन का सबसे महंगा घर है। इसे एक खूबसूरत पार्क में बना एक आलीशान महल कहा जाता रहा है। यह आलीशान घर जिस कीमत में बनाया गया था, यह अब उससे लगभग 170 गुना महंगा हो चुका है। यह घर ब्रिटेन के कॉर्नवॉल टेरेस में बना हुआ है, जो दुनिया की सबसे महंगा इलाका है। लेथब्रिज नाम का यह घर कॉर्नवॉल टेरेस में मात्र एक ऐसा घर है, जहां कैरेज ड्राइवे, स्विमिंग पूल, स्पा और डांस के लिए विशेष रूम मुहैया कराए गए हैं।

इसमें अलग से दो गेस्ट रूम भी हैं, जहां आप अपने गेस्ट को पूरे रॉयल अंदाज में ठहरा सकते हैं। यह घर 11,767 स्क्वायर फुट में बना हुआ है, जिसमें आकर्षक लिविंग एरिया, वाइन बार और एक मीडिया रूम भी है। लेथब्रिज हाउस के अंदर छह आलीशान बेडरूम और 7 बाथरूम बने हुए हैं। यह कोर्नवॉल टेरेस की आखिरी प्रॉपटीर् है, जो 1811 में बनाई गई थी और बिकने को तैयार है।

इस प्रॉपटीर् को एक बार बिल्डरों ने रीबिल्ट भी किया था। इसकी मरम्मत मेें करीब 83,000 घंटे काम किया गया था। एक साल तो इसकी नींव को ही ठीक करने मेें लगा गया था, क्योंकि यह पूरी की पूरी इमारत ही ईंट की बनी हुई है।

इसका प्राइज इंग्लैंड और वेल्स के एवरेज रेट 162,000 पौंड से 250 गुना महंगा है। इस घर को खरीदने वाले इंसान को अच्छी खासी जेब खाली करनी पड़ेगी, जिसमें उसे 6 मिलियन पौंड स्टैंप ड्यूटी के साथ 1,361.48 पौंड काउंसिल टैक्स के तौर पर खर्च करने पड़ेंगे। देखते हैं कौन सा रईस आदमी इस खरीदता है।